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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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एक ऐसी जगह भी है…

Posted on March 15, 2015 by RAHUL RAHI
एक ऐसी जगह भी है,
जहाँ…, 
तैरते हुए,
समंदर के किनारे मिलते हैं ।

सुबह भी मिलती है,
रात के ख्वाब भी मिलते हैं ।

लफ़्ज़ों की चादर में,
लब चुपचाप भी मिलते हैं ।

उलझन मिलती है,
सुलझे जवाब भी मिलते हैं ।

एक ऐसी जगह भी है,
जहाँ…
खुद से मिल जाता,
हूँ मैं कभी कभी ।

सोचता रहता हूँ मैं खो गया,
जो था यहीं अभी ।

हैं नादान जो अपने से,
अनजान भी मिलते हैं ।

शैतान भी मिलते हैं,
वहाँ भगवान् भी मिलते हैं ।

एक ऐसी जगह भी है…
जहाँ सब मिलते हैं खुद से ।

उस जगह मुझे जाना…

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