Skip to content

rahulrahi.in

मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

Menu
  • Home
  • hindi poems
  • hindi articles
  • hindi stories
Menu

कोई सोच न रहे

Posted on November 18, 2013 by RAHUL RAHI

बेहोश हूँ बेहोशी में,
उठा रहा हूँ हर कदम,
मौत का हाथ है एक हाथ में,
दूजे हाथ में रखा जनम,
सोच सोच में बीत रहा,
सदियों का मेरा लम्हा,
रिश्ते पोंछ के एक पल में,
मुझको कर वो गया तन्हा,
आँसू की भी जगह नहीं,
पोली राहें तबाह हुई,
धुंधले सपने टूट रहे,
सारे पलक से छूट रहे,
थोड़ा होश जो बाकी है,
उसमे भी दे आग लगा,
रोया रोया काँप रहा,
नस नस खून भी अकड़ पड़ा,
फिर भी करूँ मैं यही दुआ,
मेरी सुन न मेरे खुदा,
ऐसी ढूंढ में ढाल मुझे,
खोज ना रहे,
मन से कर दे दूर मुझे,
होश न रहे, कोई सोच ना रहे ।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 rahulrahi.in | Powered by Superbs Personal Blog theme