खामोश लम्हेंPosted on February 14, 2014 by RAHUL RAHIआज कल कुछ ज्यादा ही मशगूल हो गया हूँ, अपनी ज़िन्दगी में, अपने काम में कि लिखने का वक्त मिल ही नहीं पाता । ऐसा लगता है जैसे खुद से ही दूर हो गया हूँ, मशीन जैसा हो गया हूँ ।