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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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चार दिन

Posted on May 22, 2016 by RAHUL RAHI
चार दिन के चार हैं मौसम,
बरखा और बेज़ार के मौसम,
दौड़े ख़ुशियों की ख़ातिर और,
हाथ है आया सबके ग़म ।
कोई कुछ तो ग़लत चला,
फूल की जगह शूल खिला,
जिया जो बरसों खटखट करते,
जाते वक़्त क्या उसे मिला ।
राजा तन मन रानी एक,
सबकी वही कहानी एक,
राजा जो रानी का नौकर,
भटके पानी पानी देख ।
चार दिन के चार हैं मौसम,
जिसमें घुल मिल रहते हम ।

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