Skip to content

rahulrahi.in

मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

Menu
  • Home
  • hindi poems
  • hindi articles
  • hindi stories
Menu

परी के पापा – hindi poem – rahulrahi

Posted on May 30, 2015 by RAHUL RAHI
नन्ही सी एक परी,
गाउँ मैं उसकी कहानी,
ना राजा है ना रानी,
फिर भी कोई तो है ।
छोटी छोटी बातें हैं
सबकी है जानी मानी,
तुमको है सुनानी,
जिसमे कोई तो है ।
उड़ती ना थी, परी जब,
पापा की गोदी, दुनिया उसे,
घुमाती थी,
नींद ना आए जो, रातों को,
पापा की, लोरी उसे,
ख्वावों की दुनिया दिखाती थी ।
डर जाती थी, जब भी परी,
पापा उसे, हाथ पकड़कर
देते थे दम,
आने ना देते थे, आंसू कभी,
खुशियाँ थी संग, दूर…था,
हर एक गम ।
वो ही ज़मीं, वो ही आसमाँ,
कोई पूछे, खुदा है कहाँ,
कहती थी हँसके,परी सबसे,
वो है मेरे पापा ।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 rahulrahi.in | Powered by Superbs Personal Blog theme