Skip to content

rahulrahi.in

मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

Menu
  • Home
  • hindi poems
  • hindi articles
  • hindi stories
Menu

मैं नहीं तू नहीं…

Posted on September 10, 2013 by RAHUL RAHI

समंदर ठहर गया सा है,
बादल बैठे हैं एक सम्त,
फ़लक ज़मी से है जुड़ गया,
क्षितिज की कोई जगह नहीं,
मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…।

खो गया सब खो गया रब,
किसकी इबादत करूँ अभी,
ऐसा हुनर है सिखा दिया,
कोई हुनर अब बचा नहीं,
मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…।

अक्सर रूठ के बैठा था,
या खुद से छुट के बैठा था,
मुझको ऐसा तोड़ दिया,
टूटना अब कुछ बचा नहीं,
मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 rahulrahi.in | Powered by Superbs Personal Blog theme