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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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स्वर्ग में कहर

Posted on February 16, 2016 by RAHUL RAHI

ताना शाह जिंदा है, गले हमारे फंदा है,
जो आवाज़ उठाए तो, ऐसा बंदा गन्दा है ?
अपने देश का खाता है, मुर्दाबाद चिल्लाता है,
अफज़ल – खटमल चूसे खून, भाई ये कैसा नाता है ?
रोष न ये कल – परसों का, जँचा न तड़का सरसों का,
कुरेदे ज़ख्म वो माँगे है, कश्मीर का हिस्सा बरसों का ?
पिछले दरवाज़े से क्यूँ, पड़ोसी भेजे ज़हर है,
खुद झुलसे हमें चोट दे, स्वर्ग में भी क्यूँ कहर है ?
स्वर्ग में भी क्यूँ कहर है ? 

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