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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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Category: hindi poems

likh Kuch Apni – लिख कुछ अपनी – Hindi Poem

Posted on November 18, 2016 by RAHUL RAHI

Likh Kuch Apni – लिख कुछ अपनी – Hindi Poem likh kuch apni – hindi poem – rahulrahi.in निकाल कुछ पल ऐ दिल, लिख दास्ताँ अपनी,यादों की स्याही घोल,फुरसत की कलम अपना | खोल तिजोरी सपनों की,रंग बिखेर बचपन के, उड़ा छटा जवानी की,खुशियों के अफ़साने बाँध | दर – दर भटके शहरों में,कुछ सिक्कें…

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Banned notes – हज़ारी बंद – hindi poem

Posted on November 10, 2016 by RAHUL RAHI

जागो जागो भारत भाई, देर शाम एक खबर है आई, काले धन का लगा है खोट, बंद बड़े सब होंगे नोट, पाँच सौ और रुपया हज़ार, रहा ना उनका अब बाज़ार, लेने दौड़े रुपए सौ, ए टी एम की बारा पौ, गंजे हुए हज़ारी लाल, सुनकर उनके उड़ गए बाल, करने लगे वो सब बवाल,…

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Salute to Soldier – सैनिक को सलाम – Hindi Poem

Posted on October 10, 2016 by RAHUL RAHI

   चैन से हम सोते हैं हम, अपने घरों में,क्योंकि जागते रहते हैं वो, बंकरों में, चौकन्ने रहते हैं वो, जैसे कोई ध्यानी,अपने विचारों के प्रति, सजग हर घड़ी, बिन जाने पहचाने ही वो, सच्चे धर्मी हैं,जब से पहनी खा कसम, हिम्मत की वर्दी है, देश का हर एक शख्स उनका, अपना परिवार है,यही सोच…

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Amar Jawan Jyoti – अमर जवान ज्योति – hindi poem

Posted on September 18, 2016 by RAHUL RAHI

  अमर जवान ज्योति  तप रहा है भूमि का, सीना लहू की बूँद से, डर भी डर से काँपता, रहता है आँखें मूँद के । रोष है, आक्रोश है वो, होश में तैयार है, और वरूण से तेज़ उसका, दुश्मनों पे वार है । थर्र थर्रात है हिमालय, जिसके पग की चाप से, हिम पिघलता…

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The song – गीत

Posted on July 21, 2016 by RAHUL RAHI

क़िस्सा यही है गीत का, मेरी हार से जीत का, मुश्किल से उबरकर भी, मुश्किलें संजोने का, खुले दिल से पा लेना, बंद हाथ का खो देना, किसी का होकर भी ना होना, किसी में सब बिसर जाना, किसी के आँख के काँटे का, किसी के मन के मीत का, क़िस्सा यही है गीत का…

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The Window – खिड़कियाँ

Posted on July 8, 2016 by RAHUL RAHI

  एक दीवार के सीने में, धड़कती सी खिड़कियाँ, साँसें देती जीवन को, ज़िंदगी सी खिड़कियाँ । देखने का मौक़ा देती, ठहरे हुए नज़ारों को, नज़रों को उड़ान देती, ख़ुद में बंद खिड़कियाँ । और हवा के झोंको संग, लय बद्ध हो जाती है, चूमती किनारों को, टक – टक करती खिड़कियाँ । दरवाज़े की…

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Childhood – बचपन

Posted on July 6, 2016 by RAHUL RAHI

  ज़िंदगी उधार है, बचपन के हाथों में,  बारिश के पानी की, नाँव की यादों में । गीले गलियारे में, चौक चौवारे में, सौंधी सी ख़ुशबू, मिट्टी के गारे में । सड़कों पर क्रिकेट के, चौकों और छक्कों में, कल फिर से मिलने के, यारों के वादों में । तूफ़ाँ में उलटी हो जाती वो…

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Calling from Soil – मिट्टी की पुकार

Posted on June 21, 2016 by RAHUL RAHI

बेहतर थी सुबह, चाँदनी रात यहाँ होती, सपना हो गई सब बातें, सूनी है रहती, तेरे गाँव की मिट्टी… चकाचौंध से दूर, शायद यही सारा क़सूर, रग – रग में शामिल, तू ने ना जाना उसको, छोड़ा ना क़ाबिल, रस्ता देख रही तेरे गाँव की मिट्टी… अनजाने वतन को कैसे गले लगा लिया, माँ के…

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Contractor of Electricity – बिजली का व्यापारी

Posted on June 17, 2016 by RAHUL RAHI

हर हवा की आहट पर, लगता है, कोई गाड़ी आई है, वो गाड़ी मेरे यार की, रास्ते पर बैठे मैंने, कभी किसी का, इंतज़ार किया नहीं, पर आज कई घंटों से, धूप की निगरानी और, बादल की पनाह में, मैंने इंतज़ार किया उसका, वादा किया था कल उसने, सुबह भी किया था याद, साढ़े दस…

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मन से जीत

Posted on June 8, 2016 by RAHUL RAHI

मंज़िलें बहुत हैं यारा, रास्ते भी कम नहीं, जीत जो तेरे मन है तो, हारने का ग़म नहीं । ना कभी उदासियाँ हो, हो ना माथे पर शिकन, ख़्वाब की उड़ान हो, हौसला तेरा गगन । मुश्किलों का साथ तो, हर पहर टकराएगा, साथ है उसके चमन, जो, ना कभी घबराएगा । हर सफलता ढूँढे…

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