Likh Kuch Apni – लिख कुछ अपनी – Hindi Poem likh kuch apni – hindi poem – rahulrahi.in निकाल कुछ पल ऐ दिल, लिख दास्ताँ अपनी,यादों की स्याही घोल,फुरसत की कलम अपना | खोल तिजोरी सपनों की,रंग बिखेर बचपन के, उड़ा छटा जवानी की,खुशियों के अफ़साने बाँध | दर – दर भटके शहरों में,कुछ सिक्कें…
Category: hindi poems
Banned notes – हज़ारी बंद – hindi poem
जागो जागो भारत भाई, देर शाम एक खबर है आई, काले धन का लगा है खोट, बंद बड़े सब होंगे नोट, पाँच सौ और रुपया हज़ार, रहा ना उनका अब बाज़ार, लेने दौड़े रुपए सौ, ए टी एम की बारा पौ, गंजे हुए हज़ारी लाल, सुनकर उनके उड़ गए बाल, करने लगे वो सब बवाल,…
Salute to Soldier – सैनिक को सलाम – Hindi Poem
चैन से हम सोते हैं हम, अपने घरों में,क्योंकि जागते रहते हैं वो, बंकरों में, चौकन्ने रहते हैं वो, जैसे कोई ध्यानी,अपने विचारों के प्रति, सजग हर घड़ी, बिन जाने पहचाने ही वो, सच्चे धर्मी हैं,जब से पहनी खा कसम, हिम्मत की वर्दी है, देश का हर एक शख्स उनका, अपना परिवार है,यही सोच…
Amar Jawan Jyoti – अमर जवान ज्योति – hindi poem
अमर जवान ज्योति तप रहा है भूमि का, सीना लहू की बूँद से, डर भी डर से काँपता, रहता है आँखें मूँद के । रोष है, आक्रोश है वो, होश में तैयार है, और वरूण से तेज़ उसका, दुश्मनों पे वार है । थर्र थर्रात है हिमालय, जिसके पग की चाप से, हिम पिघलता…
The song – गीत
क़िस्सा यही है गीत का, मेरी हार से जीत का, मुश्किल से उबरकर भी, मुश्किलें संजोने का, खुले दिल से पा लेना, बंद हाथ का खो देना, किसी का होकर भी ना होना, किसी में सब बिसर जाना, किसी के आँख के काँटे का, किसी के मन के मीत का, क़िस्सा यही है गीत का…
The Window – खिड़कियाँ
एक दीवार के सीने में, धड़कती सी खिड़कियाँ, साँसें देती जीवन को, ज़िंदगी सी खिड़कियाँ । देखने का मौक़ा देती, ठहरे हुए नज़ारों को, नज़रों को उड़ान देती, ख़ुद में बंद खिड़कियाँ । और हवा के झोंको संग, लय बद्ध हो जाती है, चूमती किनारों को, टक – टक करती खिड़कियाँ । दरवाज़े की…
Childhood – बचपन
ज़िंदगी उधार है, बचपन के हाथों में, बारिश के पानी की, नाँव की यादों में । गीले गलियारे में, चौक चौवारे में, सौंधी सी ख़ुशबू, मिट्टी के गारे में । सड़कों पर क्रिकेट के, चौकों और छक्कों में, कल फिर से मिलने के, यारों के वादों में । तूफ़ाँ में उलटी हो जाती वो…
Calling from Soil – मिट्टी की पुकार
बेहतर थी सुबह, चाँदनी रात यहाँ होती, सपना हो गई सब बातें, सूनी है रहती, तेरे गाँव की मिट्टी… चकाचौंध से दूर, शायद यही सारा क़सूर, रग – रग में शामिल, तू ने ना जाना उसको, छोड़ा ना क़ाबिल, रस्ता देख रही तेरे गाँव की मिट्टी… अनजाने वतन को कैसे गले लगा लिया, माँ के…
Contractor of Electricity – बिजली का व्यापारी
हर हवा की आहट पर, लगता है, कोई गाड़ी आई है, वो गाड़ी मेरे यार की, रास्ते पर बैठे मैंने, कभी किसी का, इंतज़ार किया नहीं, पर आज कई घंटों से, धूप की निगरानी और, बादल की पनाह में, मैंने इंतज़ार किया उसका, वादा किया था कल उसने, सुबह भी किया था याद, साढ़े दस…
मन से जीत
मंज़िलें बहुत हैं यारा, रास्ते भी कम नहीं, जीत जो तेरे मन है तो, हारने का ग़म नहीं । ना कभी उदासियाँ हो, हो ना माथे पर शिकन, ख़्वाब की उड़ान हो, हौसला तेरा गगन । मुश्किलों का साथ तो, हर पहर टकराएगा, साथ है उसके चमन, जो, ना कभी घबराएगा । हर सफलता ढूँढे…