Skip to content

rahulrahi.in

मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

Menu
  • Home
  • hindi poems
  • hindi articles
  • hindi stories
Menu

gulabo ki chahahat – गुलाबों की चाहत – hindi poem

Posted on November 27, 2016 by RAHUL RAHI

गुलाबों की चाहत,

और काटों का डर,
डूब ना पाओगे,
पाओगे ना उबर,
ना पूरब का साथ,
ना पश्चिम का घर,
बंजारों से ही,
घूमोगे दर दर ।

झूलोगे बीच में,
घड़ी के लंगर से,
कभी गम इधर से,
कभी नाम उधर से,
गलतफहमियों की,
कोई हद न होगी,
अगर एक मुकाम,
पाने की ज़िद ना होगी ।

आवारा रूह को,
ना जन्नत ना दोजख,
पाने सुकूँ और,
भटकेगा कब तक,
चले क्यूँ वहीं,
जहाँ जाती है दुनिया,
जहाँ रहता कर्ता,
और माया की मुनिया ।

हो कुछ तो अलग,
कुछ हो सबसे परे,
जाने हर कहकशा,
एक जगह खड़े,
सारा सब एक हो,
जो भी अन्दर – बाहर,
शून्य सा शांत हो,
लहरों का वो सागर ।

हो गुलाबों से प्यार,
ना हो काँटों का डर,
जो चला लौट के,
पाएगा वो ही घर ।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 rahulrahi.in | Powered by Superbs Personal Blog theme