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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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I am traveller – राही हूँ… – Hindi Poem

Posted on September 5, 2015 by RAHUL RAHI
एक उम्मीद का दरिया हूँ, कश्ती हूँ, किनारा हूँ,
दिन में सूरज रात में चाँद, वो आकाश तुम्हारा हूँ ।

जंग सा हूँ और प्यारा भी, जीता कभी मैं हारा हूँ,
मंज़िल पाने निकला हूँ, एक राही आवारा हूँ ।

जज़्बातों के बागों में पल पल महकी एक ज़ारा हूँ,
चूक ना जाना ये लम्हा ना मिलता कभी दोबारा हूँ ।

साथ – साथ जो चले कोई तो, काबिल एक सहारा हूँ,
बाप के कंधे चढ़ आया, एक माँ की आँख का तारा हूँ ।

एक राही आवारा हूँ |

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