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Lets write something – चलो ना कुछ लिखते हैं – hindi article

Posted on October 20, 2016 by RAHUL RAHI
चलो ना कुछ लिखते हैं !!!

मुझे अब भी वो दिन याद आता है जब मैं स्कूल में था और इतिहास और भूगोल का पाठ पूरा करने में आना – कानी किया करता था | प्रथम विश्वयुद्ध, पानीपत की लड़ाई, बोस्टन टी पार्टी, चार्ल्स एक, चार्ल्स द्वितीय, तृतीय, कौन कब मारा, जिंदा हुआ क्या पता ? आधा वक्त तो बस तारीखें याद करने में ही जाता था | ऊपर से बड़े – बड़े जवाब, जिन्हें लिखते वक्त यह डर लगा रहता था कि कहीं गलती से यह प्रश्न परीक्षा में आ गया तो गए काम से ६ नंबर |

फिर वह दिन आया कि औपचारिक पढ़ाई ख़त्म हुई और मैं किसी भी प्रकार किताबी परीक्षा और गृह कार्य (HOME WORK) से मुक्त था | वाह ! एक बड़ा बोझ सर से उतर गया था, मानों किसी मध्यम वर्गीय व्यक्ति ने अपने घर की सालों की क़िस्त पूरी कर ली हो | महाबलेश्वर की पहाड़ियों के ऊपर सुकून का माहौल, ७ दिनों तक चलने वाले यूथ केम्प का पहला दिन, हाथ में एक पेन और कॉपी शायद कुछ लिखने के लिए दी गई हो | 

मुझे पता नहीं क्या और क्यूँ ? मैं तो बस उस शांत वातावरण का मज़ा ले रहा था जहाँ लगभग मेरे जैसे २०० लोग मौजूद थे पर चूँ  तक की आवाज़ नहीं थी | हवाएँ जब बहते हुए पेड़ों को छू जा रही थी तो मानों मखमल सा स्पर्श इन कानों को हो रहा था | सूर्य देव बस अभी – अभी स्नान करके निकल ही रहे थे | मेरे सामने एक बड़ा सा मैदान और उस मैदान से लगे हुए रोड़ पर घाँस का गट्ठर, जिसपर मैं विराजमान था | पता नहीं चला कि क्या हुआ, मैंने कलम के बटन को दबाया, डायरी खोली और धड़ा धड़ लिखना शुरू कर दिया | ३० मिनट के दिए गए मौन समय (MORNING SILENCE TIME) में एक बड़ी सी कविता लिख दी | कविता का पहला वाक्य, “मुझको क्या थी खबर, मैं कहाँ आ गया, खुद को खो कर है पाया, मैंने खुद को यहाँ” | खुश तो था और हैरान भी कि मामला क्या है ? जो भी लिखा था उसका कोई ज्ञान मुझे नहीं था, भला कोई खुद को खोकर कैसे पा सकता है ? जो भी हो, लग तो अच्छा रहा था |

उस मौन समय के बाद सभी का जमावड़ा एक थिएटर हॉल में हुआ, जहाँ सारे लोग आए | हमारे मेंटर मिस्टर विरल ने कहा कि जो भी आपने कहा है उसे हमारे सामने शेयर कर सकते हैं | उस दिन ना कोई झिझक महसूस हुई मुझे, ना किसी बात का डर | मुझसे ज़्यादा मेरे दोस्त परेशान थे कि राहुल कहाँ जा रहा है ? बड़ी ख़ुशी और गर्व के साथ मैं स्टेज के पास गया | बिना किसी भाषण बाजी के गुड मोर्निंग कह कर मैंने अपने शब्दों को लोगों के सामने रखा | चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए बड़ी ही शान्ति और संतुष्टि के साथ अपनी जगह आकर बैठ गया | मेरे सारे दोस्त सकते में थे कि मैं लिखता भी हूँ | सच कहता हूँ कि मुझे भी तब हही पहली बार पता चला कि लिख भी सकता हूँ |

उस दिन के बाद से आज करीब ८ – ९ साल हो गए हैं | सैकड़ों कविताएँ – गीत, कई लेख और नाटक, मेरा अपना ब्लॉग जिस पर आप यह लेख पढ़ रहे हैं इत्यादी लिखा | कई लोग पूछते हैं कितना कमा लेते हो, कब तक सेटल हो जाओगे | अरे भाई ! कमाना – गँवाना तो चलता रहेगा और आखिर ज़िन्दगी में कौन हुआ है आज तक सेटल | मेरा बस यही कहना है कि जब भी लिखता हूँ सुकून मिलता है | क्योकि मैं यह किसी के दबाव या ज़िम्मेदारी के तौर पर नहीं करता | यह मेरा home work नहीं है ना ही किसी परीक्षा में मुझे उत्तीर्ण होना है | जैसा हूँ वैसा ही प्रकृति का हूँ, लिखते वक्त ज़रा खो जाता हूँ और इसी खोने में खुद को पाता हूँ | हाँ… हर बार जब कलम कुछ वक्त के लिए ठहर जाती है तो फिर दिल कहता – चलो ना कुछ लिखते हैं |

2 thoughts on “Lets write something – चलो ना कुछ लिखते हैं – hindi article”

  1. Unknown says:
    October 23, 2016 at 12:53 pm

    Such an amazing poetry…. Mein khud hi kho gayi aapke is andaaz mein…����������������

    Reply
  2. Unknown says:
    October 23, 2016 at 12:55 pm

    Very amazing poetry… Mein khud hi kho gayi aapke iss andaaz mein…
    😘😘😘😁

    Reply

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