Soti raato me banjare,jaage jaage rehte hai,Hotho par hai taale lekin,Aankho se keh jaate hain…
खामोश लम्हें
आज कल कुछ ज्यादा ही मशगूल हो गया हूँ, अपनी ज़िन्दगी में, अपने काम में कि लिखने का वक्त मिल ही नहीं पाता । ऐसा लगता है जैसे खुद से ही दूर हो गया हूँ, मशीन जैसा हो गया हूँ ।
कोई सोच न रहे
बेहोश हूँ बेहोशी में,उठा रहा हूँ हर कदम,मौत का हाथ है एक हाथ में,दूजे हाथ में रखा जनम,सोच सोच में बीत रहा,सदियों का मेरा लम्हा,रिश्ते पोंछ के एक पल में,मुझको कर वो गया तन्हा,आँसू की भी जगह नहीं,पोली राहें तबाह हुई,धुंधले सपने टूट रहे,सारे पलक से छूट रहे,थोड़ा होश जो बाकी है,उसमे भी दे आग…
Dream Interpretation, What i feel Some times – Article – rahulrahi
what I feel Sometimes – rahulrahi.in Dream interpretation – Last night I saw a dream of an ancient man, I don’t know who was that but he told me something about water. He told me that water ll loose all his particles in 2029. In that dream I had…
मैं नहीं तू नहीं…
समंदर ठहर गया सा है,बादल बैठे हैं एक सम्त,फ़लक ज़मी से है जुड़ गया,क्षितिज की कोई जगह नहीं,मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…। खो गया सब खो गया रब,किसकी इबादत करूँ अभी,ऐसा हुनर है सिखा दिया,कोई हुनर अब बचा नहीं,मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…। अक्सर रूठ के बैठा था,या खुद…
kaun kya sikhae hame | कौन क्या सिखाए हमें?
कौन क्या सिखाए हमें? kaun kya sikhaae hume? ab itna hi wo batae hume, paida hote hi is bhook ne, dard me tarasna sikhaya hume | thode jab hum bade hue, haath chhodkar chale fire, thokar khakar girate hi,kadam jagah par lagae hume |
Thanks for those who read and write
।। लिखना – पढ़ना देन है उसकी ।। एक बार की बात है… लिखना – पढ़ना देन उसकी, जिसने बनाई ये दुनिया, पढ़ना फितरत उसकी है, जो दुनिया में है जीता । लिखते हुए न जाने कई, किरदार नए लिख देता है, पढ़ते रह जाते हम – तुम, दिल से वाह ! निकलता है । सच कहता…
तन से उल्टा मन…
इस जन्म का, थका हुआ तन, और सदियों से, भटका मन, दोनों का जो मेल हुआ, याद आए हैं भगवन ।। मन दौड़े कभी यादो में, कभी ख्वाबो में, कभी बातों में, तन आराम का चाहे दिन, सोता रहे है रातो में ।। जीने का बस ये कारण, उल्टा जीता जाए जन, हर पल सोना चाहे तन,…
मेरा मन
एक बात मेरे साथ कहो, हर पल रहने लगी है क्यूँ, फुर्सत के चंद लम्हों को, देखो है तरसे मेरा मन || रहा अनाड़ी सा पागल, ना जाने कितनी सदियों से, बेकार की सारी…
ज़माने के बाद मिले हैं यार…
ज़माने के बाद मिले है यार , अब है आठ पहले थे चार , थोड़े से बदले है वो , या बदला हु मैं, ये तो कह न पाऊंगा मैं, फिर भी जैसे है वो, मेरे अपने है, पर इतना कह न पौ मैं, साले समझेंगे मजाक कर रहा है, बिन पिए बहेक गया है,…