Skip to content

rahulrahi.in

मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

Menu
  • Home
  • hindi poems
  • hindi articles
  • hindi stories
Menu

Soti raato me

Posted on August 7, 2014 by RAHUL RAHI

Soti raato me banjare,jaage jaage rehte hai,Hotho par hai taale lekin,Aankho se keh jaate hain…

Read more

खामोश लम्हें

Posted on February 14, 2014 by RAHUL RAHI

आज कल कुछ ज्यादा ही मशगूल हो गया हूँ, अपनी ज़िन्दगी में, अपने काम में कि लिखने का वक्त मिल ही नहीं पाता । ऐसा लगता है जैसे खुद से ही दूर हो गया हूँ, मशीन जैसा हो गया हूँ ।

Read more

कोई सोच न रहे

Posted on November 18, 2013 by RAHUL RAHI

बेहोश हूँ बेहोशी में,उठा रहा हूँ हर कदम,मौत का हाथ है एक हाथ में,दूजे हाथ में रखा जनम,सोच सोच में बीत रहा,सदियों का मेरा लम्हा,रिश्ते पोंछ के एक पल में,मुझको कर वो गया तन्हा,आँसू की भी जगह नहीं,पोली राहें तबाह हुई,धुंधले सपने टूट रहे,सारे पलक से छूट रहे,थोड़ा होश जो बाकी है,उसमे भी दे आग…

Read more

Dream Interpretation, What i feel Some times – Article – rahulrahi

Posted on October 31, 2013 by RAHUL RAHI

what I feel Sometimes – rahulrahi.in             Dream interpretation – Last night I saw a dream of an ancient man, I don’t know who was that but he told me something about water. He told me that water ll loose all his particles in 2029. In that dream I had…

Read more

मैं नहीं तू नहीं…

Posted on September 10, 2013 by RAHUL RAHI

समंदर ठहर गया सा है,बादल बैठे हैं एक सम्त,फ़लक ज़मी से है जुड़ गया,क्षितिज की कोई जगह नहीं,मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…। खो गया सब खो गया रब,किसकी इबादत करूँ अभी,ऐसा हुनर है सिखा दिया,कोई हुनर अब बचा नहीं,मैं – मैं नहीं… तू – तू नहीं…। अक्सर रूठ के बैठा था,या खुद…

Read more

kaun kya sikhae hame | कौन क्या सिखाए हमें?

Posted on July 26, 2013 by RAHUL RAHI

कौन क्या सिखाए हमें? kaun kya sikhaae hume? ab itna hi wo batae hume, paida hote hi is bhook ne, dard me tarasna sikhaya hume | thode jab hum bade hue, haath chhodkar chale fire, thokar khakar girate hi,kadam jagah par lagae hume |

Read more

Thanks for those who read and write

Posted on February 17, 2012 by RAHUL RAHI

।। लिखना – पढ़ना देन है उसकी ।। एक बार की बात है… लिखना – पढ़ना देन उसकी, जिसने बनाई ये दुनिया, पढ़ना फितरत उसकी है, जो दुनिया में है जीता । लिखते हुए न जाने कई, किरदार नए लिख देता है, पढ़ते रह जाते हम – तुम, दिल से वाह ! निकलता है । सच कहता…

Read more

तन से उल्टा मन…

Posted on February 1, 2012 by RAHUL RAHI

इस जन्म का, थका हुआ तन, और सदियों से, भटका मन, दोनों का जो मेल हुआ, याद आए हैं भगवन ।। मन दौड़े कभी यादो में, कभी ख्वाबो में, कभी बातों में, तन आराम का चाहे दिन, सोता रहे है रातो में ।। जीने का बस ये कारण, उल्टा जीता जाए जन, हर पल सोना चाहे तन,…

Read more

मेरा मन

Posted on July 28, 2011 by RAHUL RAHI

एक बात मेरे साथ कहो,                                           हर पल रहने लगी है क्यूँ, फुर्सत के चंद लम्हों को, देखो है तरसे मेरा मन ||  रहा अनाड़ी सा पागल, ना जाने कितनी सदियों से, बेकार की सारी…

Read more

ज़माने के बाद मिले हैं यार…

Posted on May 7, 2011 by RAHUL RAHI

ज़माने के बाद मिले है यार , अब है आठ पहले थे चार , थोड़े से बदले है वो , या बदला हु मैं, ये तो कह न पाऊंगा मैं, फिर भी जैसे है वो, मेरे अपने है, पर इतना कह न पौ मैं, साले समझेंगे मजाक कर रहा है, बिन पिए बहेक गया है,…

Read more

Posts pagination

  • Previous
  • 1
  • …
  • 7
  • 8
  • 9
  • 10
  • 11
  • Next
© 2026 rahulrahi.in | Powered by Superbs Personal Blog theme