ek zamane ke baad – hindipoem – rahulrahi.in किस्सों की जब तह खुली, तेरे ज़िक्र के बाद, इत्र सा महका लम्हा, एक ज़माने के बाद । होश खोया सच को पाया, सब गया सा हुआ, फ़िक्र गायब मन आज़ाद, मेरे जाने के बाद । घूमते फिरे पर्वत पर्वत, मिला ना कोई निशाँ, आसमाँ गिरा पैरों…
Saboot – सबूत – hindi poem – rahulrahi.in
saboot – hindi poem – rahulrahi.in अपनी ही अदालत में, सबूत कौन सा,दे दो जाने दो, सज़ा जीते जी, कब किसको क्या पड़ी, जिया कौन था? मरा कौन था?फिर आई उसके जो, ताकत हाथ में,कल तक था जो शरीफ, कातिल नकाब में,उसने जलाने की ठानी थी लेकिन,थी उसकी गाँव में दीवानी लेकिन,जब से है सबने…
The Third Eye – ज़माने की तीसरी आँख – Hindi Article – Rahulrahi.com
Madhuri Sarode’s first sale बचपन में जब टेलीविज़न पर किसी हिन्दू धार्मिक धारावाहिक का प्रसारण होता तो एक बड़े ही विशेष देव “महादेव” अर्थात शंकर भगवान् का और उनकी तीसरी आँख का चित्रण हो आता। हर किसी को यह पता था कि वह प्रलय की आँख है। वो खुली कि दुनिया का विनाश पक्का। मैं…
Jee Bhar Ke – जी भर के – hindipoem – rahulrahi.in
jee bhar ke – rahulrahi.in जी भर के मुझे ग़म दे, तू किसी से ना कम दे, इतनी तसल्ली कर लूँ कि, किस बात का तू मुझे नम दे । औरों की तरह ना बेपरवाह, गैरों सा मुझसे बरता कर, तू चाहे मुझे पूरे दिल से, तो आज़ादी से इत्तेला कर, प्यार ही तो बस…
Ami – Nectar of life – अमि का जल – rahulrahi – poem
Ami ka Jal – rahulrahi.in वो क्या अलफ़ाज़ बिछाऊँ कि तुम तक, बात पहुँचे, हर रात पहुँचे, मेरी याद पहुँचे । वो कौन सा गीत मैं गाऊँ वो राग, जो प्रीत खिले, हर रीत से आगे, मीत मिले । वो कौन से रंग से भरूँ ज़िन्दगी कि, चित्र बने हर भाव का, ना हो अभाव…
Again – पुनः – Hindi Poem
तो क्या था वो जो फिर से हुआ, कि मैंने तुम्हें था जो खत लिखा, तुमने लगाया था सीने से, और बदले में था कुछ ना कहा, थे सोच में तुम था सोच में मैं, कि आगे जाने क्या होगा ? देखा था तुम्हें मैंने ख़्वाबों में, जो आधा अधूरा टूट गया, भविष्य का जैसे…
The God of your house – तेरे घर का भगवान – hindi poems
बताओ ना, हम जीते क्यूँ हैं, जो डर है, पता है, मौत तो आनी है एक दिन । बताओ ना, हम साँस क्यूँ हैं लेते, जो एक रोज़, जाने के बाद, वो मेहमाँ ही रहेगी शायद हमेशा । बताओ जो ये हक़ीक़त ही है, जो है सबको पता तो, फिर क्यों फैलाया ये, रंगीन मेला…
Ae Khwab – ऐ ख़्वाब – hindi poem – gazal – rahulrahi
शब ए फ़ुर्सत में तू आना, ऐ ख़्वाब, दिन में तेरा नहीं काम, ज़माना नहीं। हो ना जाएँ कहीं रंग ये, तेरे खराब, रात के सिवा, तेरा कोई, ठिकाना नहीं। तेरा फन, तेरा हुनर, लाजवाब, पर किसी को, ये अज़ाब, बताना नहीं। कोई खेलेगा तुझसे, कोई झेलेगा तुझको, कर तू बात, यहाँ दिल, लगाना नहीं। कहूँ दिल से…
Be happy Live Well – खुश रहें बेहतर जिएँ – hindi article
खुश रहें बेहतर जिएँ क्या करते हैं आप एक अच्छी नींद के लिए? दिन भर काम करते हैं। मौज-मस्ती, मेहनत, आराम या फिर कुछ और। या फिर ये सब, या फिर इनमे से कुछ भी नहीं. स्वस्थ होंगे तो इतना ही करते होंगे, और मानसिक कबड्डी से परेशान होंगे, तो फिर नींद की गोली खाकर सो…
mook – मूक – hindi poem – rahulrahi
मूक – Silence – Hindi Poem चुप सा बैठ थोड़ी देर , यूँ ही न बवाल कर, चाहे इल्म-ए-ज़िन्दगी, तो खुद से सवाल कर । घिसना क्या ये जिस्म बस, दौलत की खातिर, खुद की ना मेरी सही, रूह का ख़याल कर । बाल ही बनाए जा, आईने में क्या फ़न?, खुद आईना बन जा…