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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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Tana Bana – ताना बाना – Hindi Poems

Posted on February 2, 2016 by RAHUL RAHI

बुनने लगा फिर वो ताना – बाना, यादों को अपने फिर से सजाना, कहता है पागल सारा ज़माना, अपनी ही धुन में वो है दिवाना | फिक्रों के ऊपर ज़िक्र है जिसका, उसको ही अपने दिल में बिठाना, वो ही एक सच्चा – सादा तराना, फिर भी हर एक से है अनजाना | हर कोई…

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A Fable – क़िस्सा – Hindi Poem

Posted on December 26, 2015 by RAHUL RAHI

हम सब हिस्से, क़िस्से के, उन क़िस्सों की कहानी एक, हर दिन का हर एक पन्ना, कुछ ख़ुशियों का, कुछ ग़म का । कोई ना जाने जीवन की, राह कहाँ ले जानी है, पकड़ ना पाया कोई मन, जीवन बहता पानी है । फिर भी सब सारे जीते, भूत – भविष्य की छत नीचे, भटक…

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A moment of Hope – उम्मीद से भरा एक पल – Hindi Poem

Posted on September 21, 2015 by RAHUL RAHI

उम्मीद से भरा एक पल हूँ, तुम्हें जीना चाहता हूँ, दरवाज़े तुम्हारे मन के, बंद रहते हैं हर सुबह । हर दोपहर भी राह तुम्हारी, देखी है, पेड़ों के तले, एक रोटी आराम की, संतोष भरा जल का लोटा, मैं लेकर के बैठा हूँ, ना जाने तू कब आएगा । लो साँझ फिर से आ…

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Is that flower too – क्या वो फूल भी… – Hindi Poem

Posted on September 6, 2015 by RAHUL RAHI

Is that flower too – क्या वो फूल भी… – Hindi Poem एक रात, उस फूल की ओर देखकर, एक ख़याल दौड़ा आया, क्या तुम भी आँखें मूंदकर, सो जाते हो रात में, या फिर बदलते हो करवट, ख्वाबों की बारात में । क्या तुम प्रेम में पड़ते हो, उस भँवरे के जो आता है,…

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I am traveller – राही हूँ… – Hindi Poem

Posted on September 5, 2015 by RAHUL RAHI

एक उम्मीद का दरिया हूँ, कश्ती हूँ, किनारा हूँ, दिन में सूरज रात में चाँद, वो आकाश तुम्हारा हूँ । जंग सा हूँ और प्यारा भी, जीता कभी मैं हारा हूँ, मंज़िल पाने निकला हूँ, एक राही आवारा हूँ । जज़्बातों के बागों में पल पल महकी एक ज़ारा हूँ, चूक ना जाना ये लम्हा…

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Where are jihadi – मैं जन्नत में हूँ – जिहादी कहाँ है – Hindi Poem – Rahulrahi

Posted on July 29, 2015 by RAHUL RAHI

Jihadi Kahan hai – hindi poem – rahulrahi.in देखो खुली वादियाँ, खो ले है बाँहें खड़ी, लेकिन लिए आँखे नम, वो मेरी माँ रो रही…  क्यों मेरी माँ रो रही ? मैं जन्नत में हूँ, कहर हर जगह है, मैं जन्नत में हूँ, रहम तू कहाँ है…  था जगा दिन नया, सर्दियों के हाथों में,…

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ग़म में बैठा – ग़ज़ल

Posted on July 29, 2015 by RAHUL RAHI

saza dene wala bhi hai gam me baitha, mera katl karke wo hai nam me baitha, meri kabr ho jese uska gharonda, main ho jau zinda bharam me hai baitha Meri ruh padhti hai uska hi kalmaa Meri nazme gaate sharm me hai baitha The us aasmaa pe bane apne rishte, Mujhe kho ke wo…

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भावनाओं के वश में

Posted on June 18, 2015 by RAHUL RAHI

जब भी लिखने की इच्छा जागी, वो पैसे कमाने के लिए या किसी को इम्प्रेस करने के लिए नहीं, लेकिन दिल में दबी किसी बात या इच्छा को बाहर निकालने के लिए हुई । अपनी बात कहने के लिए, सुनाने के लिए कोई होती नहीं अपनी डायरी के अलावा । इसीलिए यही तरीका मैंने अपनाया…

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RAFTAAR – रफ़्तार

Posted on June 16, 2015 by RAHUL RAHI

तेज़ कर रफ़्तार तेरी, मंजिलें हैं दूर बड़ी, खामोश…  हो ना जाए तेरे कदम, रख हौसला, पहुँचेगा तू,एक दिन… | सुन तू बस तेरे दिल की, दे अगर ना साथ कोई,  यारा…  तेरे संग है तेरे कदम, रख हौसला पहुँचेगा तू, एक दिन… | मायूसियों की लहरें, समंदर तेरे रास्ते, तूफ़ान ये ग़मों का,भिगोने के…

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फिर वही मन

Posted on June 1, 2015 by RAHUL RAHI

ना जाने किसके ख्वाब में, तरसती हैं आँखें सोने को, मंज़िल से प्यारी लगती हैं राहें, भटकने को खोने को । क्यों अनजाने यार के, दीदार में राही का मन है, खुशियों की फिराक में, मजबूर है रोने को । तस्वीर पिरोने लगे खयाल, ज़ेहनों के बन्दे करे बवाल, बेख़ौफ़ चले नाकामी से, दरिया में…

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