बुनने लगा फिर वो ताना – बाना,
यादों को अपने फिर से सजाना,
कहता है पागल सारा ज़माना,
अपनी ही धुन में वो है दिवाना |
फिक्रों के ऊपर ज़िक्र है जिसका,
उसको ही अपने दिल में बिठाना,
वो ही एक सच्चा – सादा तराना,
फिर भी हर एक से है अनजाना |
हर कोई उसकी बातें बनाए,
हक़ जमाए अपना बताए,
अपने ही हाथो परचम लहराना,
उसके इरादों को किसने है जाना |
सीधा चले वो उल्टा ज़माना,
अपनी ही धुन में बुने ताना – बाना |
