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मंज़िल नज़र भर है, राही सफ़र पर है।

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The Window – खिड़कियाँ

Posted on July 8, 2016 by RAHUL RAHI
 
एक दीवार के सीने में,
धड़कती सी खिड़कियाँ,
साँसें देती जीवन को,
ज़िंदगी सी खिड़कियाँ ।

देखने का मौक़ा देती,
ठहरे हुए नज़ारों को,
नज़रों को उड़ान देती,
ख़ुद में बंद खिड़कियाँ ।
और हवा के झोंको संग,
लय बद्ध हो जाती है,
चूमती किनारों को,
टक – टक करती खिड़कियाँ ।

दरवाज़े की बहन है छोटी,
रोशन कर देती है घर,
ऊष्ण शीत का बेहतर संगम,
संयम बरते खिड़कियाँ ।
पास – पड़ोस की बातों का,
गप्पों का ज़रिया प्यारा,
मन भावन हर ज़ायक़े की,
गंध उड़ाती खिड़कियाँ ।
सबकुछ दिया है रब ने सब को,
प्यार, वफ़ा, जज़्बा, चाहत,
फिर क्यूँ ना दी मन को खोलने-
-वाली साफ़ सी खिड़कियाँ ।

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